ध्रुव टीला, बिट्ठुर में वह स्थल है जहां नन्हे बच्चे ध्रुव ने अपने बचपनकाल में एक पैर पर खड़े होकर भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी। ध्रुव ने अपन भक्ति से भगवान को प्रसन्न कर दिया था और फलस्वरूप एक अमर तारा बनने...
वाल्मीकि आश्रम, वह स्थल है जहां ऋषि वाल्मीकि ने बैठकर महाकाव्य रामायण की रचना की थी। यही वह स्थल है जहां माता सीता ने अपने निर्वासन के दिनों में शरण ली थी और अपने जुडवां पुत्रों लव व कुश को जन्म दिया था। इसी स्थान पर रहकर महान ऋषि ने लव व...
ब्रह्मवर्त घाट, गंगा नदी के किनारे कन्नौज रोड़ पर स्थित है। इस शांत जगह का महान धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने अपने निवास स्थान के रूप में बिट्ठुर को चुना था और यहीं उन्होने मानव जाति का सृजन किया...
पत्थर घाट, बिट्ठुर शहर में ही स्थित है जो लाल बलुआ पत्थरों से बना हुआ है और भारत के सबसे सुंदर घाटों में से एक है। इस घाट की नींव टिकैत राय ने रखी थी, जो अवध के मंत्री हुआ करते थे। यह घाट, तेजस्वी कला और स्थापत्य कला का...