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  • 01जयंती देवी मंदिर

    जयंती देवी मंदिर

    जयंती देवी मंदिर का निर्माण 550 वर्ष पूर्व हुआ था। इसे हिमाचल प्रदेश में स्थित कांगड़ा के शासक की बेटी की इच्छा के सम्मान में बनवाया गया था। शासक की बेटी का विवाह हथनौर के शासक के बेटे के साथ हुआ था जो चंडीगढ़ के उत्तर में स्थित है। राजकुमारी, जयंती देवी की प्रबल...

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  • 02अश्विनी कुमार

    अश्विनी कुमार

    ऋग वेद के अनुसार अश्विन जुड़वां देवता हैं, जिन्हें इंद्र, सोम एवं अग्नि के बाद महत्वपूर्ण देवता माना जाता है। इन्हें महानता के पीछे तीन मुख्य कारण हैं। पहला, वे सच्चाई के प्रबल संरक्षक और झूठ के भयंकर विरोधी हैं। दूसरा, वे हमेशा घोड़े पर रहते हैं। तीसरा, वे...

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  • 03श्री तीर्थ

    श्री तीर्थ

    श्री तीर्थ या धार्मिक केंद्र में शालिग्राम रखा गया है। शालिग्राम एक कीमती पत्थर है जो आम तौर पर काले रंग का होता है। असली शालिग्राम जीवाश्म पत्थर हैं जो नेपाल की गंडकी नदी और हिमालय के कुछ क्षेत्रों में मिलते हैं। इनका आकार गोलाकार, डिस्कस की तरह होता है।

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  • 04शंखिनी तीर्थ

    शंखिनी तीर्थ

    हिंदुओं की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार, एक महिला को दिव्य शक्ति की अभिव्यक्ति का रूप माना जाता है। दूसरे शब्दों में, वह शक्ति का प्रतीक है जो देवी माँ के महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है| अन्य तत्वों में है, करुणा, प्रेम और उदारता। शास्त्रों के अनुसार...

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  • 05रामराई

    रामराई

    रामराई या रामराय एक जाट बहुल गाँव है जो जींद जिले के पश्चिमी भाग में जींद-हंसी रोड पर आठ किमी दूर स्थित है। इस गाँव का नाम राम्हरादा से पड़ा है जो एक तालाब है। इस तालाब का निर्माण गुस्सैल योद्धा संत परशुराम ने किया था।

    वामन पुराण के अनुसार, राम्हरादा को...

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  • 06हज़रत ग़ैबी साहिब

    हज़रत ग़ैबी साहिब

    हरियाणा का वह क्षेत्र जहाँ जींद अपने सेटलाईट शहरों, कस्बों और गाँव के साथ स्थित है, राज्य के सर्वाधिक प्राचीन आवासों में से एक है। इनके नामों एवं उत्पत्ति का का उल्लेख पौराणिक काल से मिलता है। यह जिला केवल हिंदुओं के ही प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थानों,...

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  • 07धमतान साहिब गुरुद्वारा

    धमतान साहिब गुरुद्वारा

    आम तौर पर ‘साहिब’ शब्द का प्रयोग सिखों के मंदिर गुरुद्वारे से संबंधित है। परंतु इसका प्रयोग एक गाँव के लिए क्यों किया गया, इसका कारण यह है कि धमतान एक धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल है। धमतान एक शब्द ‘धर्मस्थान’ का बिगड़ा हुआ स्वरूप है जिसका...

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  • 08पुष्कर तीर्थ

    पुष्कर तीर्थ

    पुष्कर का मंदिर पोंकर खेरी गाँव में स्थित है जो जींद के दक्षिण में बीस किमी दूर स्थित है। इसे जमदग्नि और रेणुका के पुत्र परशुराम ने बनवाया था, जिसका उल्लेख पौराणिक शास्त्रों में भी मिलता है। वे भगवान् शिव के शिष्य थे। उनका वंश ब्रम्हा से उत्पन्न हुआ था।

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  • 09हंसदेहर

    हंसदेहर

    जींद जिला अपने आप में ही एक पौराणिक शहर है जिसमें प्राचीन युग के कई गाँव और कस्बे सम्मिलित हैं। इनमें से कई आवासों (गाँव और कस्बों) के नाम पुराणों के आधार पर रखे गए हैं एवं इनकी उत्पत्ति भी पौराणिक काल में हुई है जिसका उल्लेख शास्त्रों में भी मिलता है। हंसदेहर...

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  • 10सफीदों

    सफीदों

    सफीदों, जींद जिले में एक तहसील मुख्यालय है। यह जींद से 35 किमी दूर पश्चिमी यमुना नहर की हंसी शाखा पर स्थित है। यहाँ पानीपत- जींद रेलवे लाइन से भी पहुंचा जा सकता है। इस क्षेत्र के कई अन्य शहरों, कस्बों और गांवों की तरह सफीदों की उत्पत्ति का संबंध भी प्रागैतिहासिक...

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  • 11एकहंस

    एकहंस

    ‘हंस’ शब्द प्रवासी पक्षी हंस को संदर्भित करता है जो हिंदू-बौद्ध विचारों के अनुसार देवी सरस्वती का वाहन है। देवी ने इस वाहन को क्यों चुना, इसका कारण ये है कि यह बहुत उंचाई पर बिना रुके 7000 मील की दूरी तय कर सकता है।

    हंस एक बार-सिर वाला पक्षी है...

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  • 12भूतेश्वर मंदिर

    भूतेश्वर मंदिर

    भूतेश्वर मंदिर का यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह मंदिर भगवान् शिव को समर्पित है जिन्हें यहाँ भूतनाथ कहा जाता है। भूतनाथ, भूतों एवं आत्माओं के स्वामी हैं। यही कारण है कि उत्तर भारत में लगभग सभी शमशान भगवान् की भव्य मूर्तियों से सजे हुए हैं। जब एक व्यक्ति की मृत्यु...

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  • 13मुन्जावत

    मुन्जावत

    मुन्जावत तीर्थ, निर्जन गाँव में स्थित है जो जींद से छह किमी दूर स्थित है। वामन पुराण के अनुसार, यह पवित्र स्थल देवताओं के स्वामी भगवान् शिव से संबंधित है। भगवान् शिव को कई नामों से जाना जाता है जिसमें से एक नाम मृत्युंजय या ‘मृत्यु पर विजय प्राप्त करने...

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  • 14कायाशोधन तीर्थ

    ‘कायाशोधन’ शब्द दो शब्दों ‘काया’ और ‘शोधन’ से मिलकर बना है। जहाँ काया का अर्थ है शरीह वहीं शोधन का अर्थ है सफाई, डीटौक्सीफिकेशन या सभी अशुद्ध और विषाक्त पदार्थों से शरीर की मुक्ति। कायाशोधन की प्रक्रिया में तीन मुख्य चरण होते...

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  • 15यक्षिणी तीर्थ

    यक्ष और यक्षिणी देवी एवं देवता हैं। इनका जैन धर्म में विशेष स्थान है। जैन धर्म के अनुसार, इन्हें स्वर्ग के देवता इंद्र ने जैन तीर्थंकरों की रक्षा करने के लिए नियुक्त किया है। इसलिए यक्षिणीयों को सुरक्षा करने वाले देवता भी कहा जाता है। जैन चित्रों या मूर्तियों में...

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