यात्रियों को जैन मठ जाने की भी सलाह रहती है। लोग इस मठ को चारूकीर्ति भट्टरक स्वामीजी के मठ के नाम से जानते हैं। इस मंदिर के आराध्य देव, भगवान चंद्रांथ, को गर्भगृह में स्थापित किया गया है।
तीन मंजिला जैन मठ की पहली मंजिल सन 1912 की बनी है। यहां पर्यटकों को...
पर्यटकों को श्रवणबेलगोला की यात्रा पर अक्कानबसदी मंदिर जरूर देखना चाहिए। यह तीर्थ स्थल चन्द्रमौली अचिक्का (होयसल शासक बल्लाल द्दितीय के ब्राह्रण मंत्री) की पत्नी द्वारा 1121 में बनवाया गया था। सोप पत्थर से बना यह मंदिर होयसल वास्तुकला एवं मूर्तिकला शैली का...
श्रवणबेलगोला की यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों को भंडारीबसदी मंदिर जरूर घूमना चाहिए। 266x78 फिट आकार वाला यह मंदिर श्रवणबेलगोला में सबसे बड़े तीर्थ स्थलों में से है। यह मंदिर 1126ई0 में हल(होयसल राजा के खजांची) नें बनवाया था। भंडारीबसदी मंदिर, जो चतुरविमशती-जिनालय...
पर्यटकों को श्रवणबेलगोलामें चन्दनगिरी की चोटी पर स्थित चंदनगिरी मंदिर घूमने की सलाह रहती है। आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्त-चक्रवर्ती के के शिष्य चामुंडराय द्वारा बनवाया गया यह मंदिर सबसे ज्यादा प्रसिद्द जैन मंदिरों में से है। यह स्थान, जोकि इरूव ब्रह्देव मंदिर के...
श्रवणबेलगोलाकी यात्रा पर, यात्रियों को कलम्मा मंदिर जाने की सलाह रहती है। यह मंदिर देवी काली को समर्पित है। खास नोट करने वाली बात यह है कि श्रवणबेलगोलामें कलम्मा मंदिर ही एकमात्र हिन्दु तीर्थ स्थल है। कलम्मा मंदिर अक्कनाबसदी मंदिर के समीप ही स्थित है।
...श्रवणबेलगोला की यात्रा पर यात्रियों को विध्यागिरी की पहाड़ियों में स्थित विद्यागिरी मंदिर भी जाने की संस्तुति की जाती है। विध्यागिरी मंदिर,जिसे ओडेगल बासडी के नाम से जाना जाता है, में तीन सेल हैं जो पहाड़ी पर स्थित हैं तथा इसमें 572 सीढ़ियां है। स्थल पर जाते समय,...
श्रवणबेलगोला में पर्यटकों की पहली पसंद गोम्मतेश्वर मूर्ति इस नगर का मुख्य आकर्षण है। 17 मीटर या 58 फीट ऊंची यह मूर्ति पूरे विश्व में एक पत्थर से निर्मित (एकाश्म) सबसे विशालकाय मूर्ति है। इस मूर्ति को गंग वंश के राजा राजमल्ल एवं उसके सेनापित चामुंडराय नें बनवाया...